नवग्रह शांति एवं दोष निवारण पूजा
सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु के कुप्रभावों की शांति हेतु वैदिक विधान

रामघाट, उज्जैन
पूजा का शास्त्रोक्त स्वरूप एवं महत्व
उज्जैन खगोल शास्त्र का उद्गम स्थल है। यहां नवग्रहों की शांति से जीवन में स्थिरता, मानसिक शांति और व्यावसायिक उन्नति प्राप्त होती है।
ग्रहों की शांति से उनके नकारात्मक प्रभाव मंद पड़ जाते हैं और शुभ ग्रहों की अनुकूलता में वृद्धि होती है।
उज्जैन तीर्थ में ही क्यों?
उज्जैन के त्रिवेणी संगम पर प्राचीन नवग्रह मंदिर स्थित है, जिसे शनि व नवग्रह शांति का प्रमुख केंद्र माना गया है।
शास्त्रोक्त वैदिक पूजा विधि
उज्जैन के पावन तीर्थ पर प्रत्येक अनुष्ठान संपूर्ण वैदिक शुचिता एवं मर्यादा से संपन्न होता है।
नवग्रह मंडल निर्माण
रंग-बिरंगे अक्षतों से नौ ग्रहों के मंडल का वेदी पर निर्माण।
ग्रह आह्वान व संकल्प
यजमान के नाम से सभी नौ ग्रहों का विधिवत आह्वान व पूजन।
बीज मंत्र जाप
प्रत्येक ग्रह के लिए वैदिक बीज मंत्रों का सस्वर पाठ।
नव समिधा हवन
आक, पलाश, खैर, अपामार्ग, पीपल, गूलर, शमी, दूर्वा व कुशा से आहुतियां।
पूजा पैकेज एवं दक्षिणा विवरण
सभी पैकेजों में संपूर्ण पूजन सामग्री, वैदिक विद्वान पंडित जी की दक्षिणा एवं व्यवस्था सम्मिलित है। कोई अतिरिक्त या छिपा हुआ शुल्क नहीं है।
संपूर्ण नवग्रह शांति पूजा
- व्यक्तिगत संकल्प एवं नवग्रह मंडल पूजन
- नौ ग्रहों के वैदिक बीज मंत्र
- नव समिधा महाहवन
- नवग्रह यंत्र एवं रक्षासूत्र
पूजा की तैयारी एवं वस्त्र नियम
वैदिक पूजा में शुचिता एवं नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक माना गया है।
पारंपरिक धोती-कुर्ता (पीला अथवा सफेद)
साड़ी अथवा सलवार-सूट (पीला, नारंगी अथवा लाल)
शुभ मुहूर्त एवं श्रेष्ठ तिथियां
शास्त्रीय मान्यता अनुसार इन पावन तिथियों पर यह अनुष्ठान विशेष फलदायी होता है:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या यह पूजा नए घर में प्रवेश या नए व्यापार के समय भी कराई जा सकती है?
बिल्कुल, गृह प्रवेश, नवीन व्यापार प्रारंभ अथवा जीवन में किसी नए अध्याय की शुरुआत से पहले नवग्रह शांति कराना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
शुभ मुहूर्त में अपने नाम एवं गोत्र से संकल्प करवाएं
पंडित जी से सीधे बात कर अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करवाएं और उपयुक्त तिथि सुनिश्चित करें।