मां बगलामुखी महापूजा एवं अनुष्ठान
शत्रु शमन, न्यायालयीन विवादों में विजय, एवं आकस्मिक संकटों से सुरक्षा हेतु पीतांबरा देवी साधना

मां बगलामुखी पीठ, नलखेड़ा / उज्जैन
पूजा का शास्त्रोक्त स्वरूप एवं महत्व
यह उग्र महाविद्या साधना केवल शास्त्रोक्त नियमों और सात्विक अनुशासन के साथ अनुभवी तांत्रिक व वैदिक ब्राह्मणों द्वारा संपन्न कराई जाती है। इसमें हल्दी, पीले पुष्प, पीत वस्त्र एवं घृत का उपयोग होता है।
मां बगलामुखी साधक के मार्ग के समस्त अवरोधों को स्तंभित कर विजय एवं सुरक्षा का वरदान देती हैं।
उज्जैन तीर्थ में ही क्यों?
उज्जैन के भैरव क्षेत्र एवं निकटवर्ती नलखेड़ा शक्तिपीठ को महाभारत कालीन बगलामुखी सिद्ध स्थल माना गया है, जहां युधिष्ठिर ने विजय प्राप्ति हेतु साधना की थी।
शास्त्रोक्त वैदिक पूजा विधि
उज्जैन के पावन तीर्थ पर प्रत्येक अनुष्ठान संपूर्ण वैदिक शुचिता एवं मर्यादा से संपन्न होता है।
पीत वेदी प्रतिष्ठा व संकल्प
हल्दी से वेदी का निर्माण, पीत वस्त्र बिछाना एवं न्याय प्राप्ति का संकल्प।
बगलामुखी यंत्र पूजन
स्वर्ण अथवा तांबे के सिद्ध बगलामुखी यंत्र का हल्दी-चंदन से पूजन।
हल्दी माला से बीज मंत्र जप
विद्वानों द्वारा 'ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां...' का सस्वर जप।
पीली समिधा व पीली सरसों हवन
पीली सरसों, हल्दी गांठ, मधु एवं घी से शत्रुओं के दोष शमन हेतु हवन।
पूजा पैकेज एवं दक्षिणा विवरण
सभी पैकेजों में संपूर्ण पूजन सामग्री, वैदिक विद्वान पंडित जी की दक्षिणा एवं व्यवस्था सम्मिलित है। कोई अतिरिक्त या छिपा हुआ शुल्क नहीं है।
बगलामुखी शत्रु शमन पूजा
- व्यक्तिगत संकल्प एवं यंत्र पूजन
- 5,100 बगलामुखी बीज मंत्र जप
- पीली सरसों एवं हल्दी हवन
- सिद्ध रक्षा ताबीज प्रेषित
विशेष 36,000 जप महाअनुष्ठान
- 4 विद्वानों द्वारा 3 दिन तक 36,000 अखंड बीज मंत्र जाप
- प्रत्येक दिन दशांश हवन एवं विशेष अर्घ्य
- न्यायालयीन विवाद व कर्ज मुक्ति हेतु विशेष आहुतियां
- प्रतिष्ठित श्री बगलामुखी यंत्र एवं महाप्रसाद
- लाइव वीडियो कॉल प्रसारण
पूजा की तैयारी एवं वस्त्र नियम
वैदिक पूजा में शुचिता एवं नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक माना गया है।
पीला कुर्ता व पीली धोती
पीली साड़ी अथवा पीला सलवार सूट
शुभ मुहूर्त एवं श्रेष्ठ तिथियां
शास्त्रीय मान्यता अनुसार इन पावन तिथियों पर यह अनुष्ठान विशेष फलदायी होता है:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मां बगलामुखी की पूजा किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए की जा सकती है?
कदापि नहीं। मां बगलामुखी की पूजा केवल अपनी आत्मरक्षा, सत्य की विजय, अनावश्यक मुकदमों से मुक्ति और निर्दोष की रक्षा हेतु सात्विक भाव से की जाती है। दुर्भावना से की गई पूजा निष्फल होती है।
शुभ मुहूर्त में अपने नाम एवं गोत्र से संकल्प करवाएं
पंडित जी से सीधे बात कर अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करवाएं और उपयुक्त तिथि सुनिश्चित करें।